किशोर छात्र-छात्राओं में इण्टरनेट की व्यवहारिक उपयोगिता का एक सर्वेक्षण: जनपद अम्बेडकर नगर के विशेष संदर्भ में
सोनम चौरसिया1, डॉ0 दीप्ति सुनेजा2
1शोध छात्रा, गृहविज्ञान विभाग, गुरुनानक गर्ल्स पी0जी0 कॉलेज, कानपुर (उ0प्र0)
2एसोसिएट प्रोफेसर, गृहविज्ञान विभाग, गुरुनानक गर्ल्स पी0जी0 कॉलेज, कानपुर (उ0प्र0)
*Corresponding Author E-mail: sonamchaurasia404@gmail.com
ABSTRACT:
इण्टरनेट इण्टरनेशनल नेटवर्क का संक्षिप्त रूप है। यह विश्व में फैले हुए सभी छोटे-बड़े कम्प्यूटरों का एक विश्व व्यापी जाल है। इसमें कुछ सामान्य नियमों का पालन कर विभिन्न संचार माध्यमों के द्वारा एक-दूसरे से सम्पर्क स्थापित कर सूचनाओं के आदान-प्रदान को संभव बनाता है। भारत में इण्टरनेट की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की लगभग 65ः जनसंख्या 35 वर्ष से कम उम्र की है। जो सूचना और प्रौद्योगिकी से सर्वाधिक प्रभावित होती है। यदि इण्टरनेट और सूचना प्रौद्योगिकी का सही प्रशिक्षण प्राप्त हो तो यह इनके विकास में उपयोगी होगा। प्रस्तुत शोध पत्र में किशोर छात्र-छात्राओं में इण्टरनेट की व्यवहारिक उपयोगिता के संदर्भ में अध्ययन किया गया है कि इण्टरनेट उक्त आयु वर्ग (13-18 वर्ष) के किशोर छात्र-छात्राओं के दैनिक जीवन में किस प्रकार उपयोगी है। उनके अध्ययन और व्यक्तित्व निर्माण तथा व्यवहारिक परिवर्तन में। प्रस्तुत शोध पत्र में शोध अध्ययन हेतु प्राथमिक तथा द्वितीयक स्रोत से प्राप्त आँकड़ों का प्रयोग किया गया है। यह शोध पत्र विश्लेषणात्मक और गुणात्मक शोध अध्ययन पर आधारित है। आँकड़ों की व्याख्या हेतु व्यक्तिगत अनुभव जो अध्ययन क्षेत्र से प्राप्त हुआ का प्रयोग किया गया है। यह शोध पत्र किशोर छात्र-छात्राओं के इण्टरनेट के सीमित तथा आवश्यक उपयोग में सहायक सिद्ध होगा।
KEYWORDS: किशोर छात्र-छात्रा, इण्टरनेट, उपयोगिता, सर्वेक्षण।
प्रस्तावना: -
वर्तमान वैज्ञानिक युग में कोई भी इण्टरनेट से अछूता नहीं है अपितु हमारे दैनिक जीवन के सभी क्रियाकलाप इससे प्रभावित होते हैं। यह कम समय में तथ्यपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के सर्वसुलभ माध्यम बनता जा रहा है। इण्टरनेट मुख्य रूप से विभिन्न नेटवर्कों का जाल होता है। जिसमें विभिन्न जानकारियाँ एकत्रित होती हैं। प्रयोगकर्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार इनका उपयोग करता है। शिक्षा के क्षेत्र में इण्टरनेट के उपयोग से बहुत लाभ मिल रहा है। इसके कारण ऑनलाईन शिक्षा प्रणाली ई-शिक्षण सामग्री, आभासी माध्यम से विषय विशेषज्ञ तक आसान पहुँच ने शिक्षक तथा छात्र दोनों के मध्य दूरी कम किया है तथा सीखने की गुणवत्ता में गुणात्मक परिवर्तन आ रहा है। किशोरावस्था मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था मानी जाती है। इस अवस्था में किशोर तथा किशोरियों के व्यवहारों में रूचियों एवं रूझानों में महत्वपूर्ण परिवर्तन आते हैं। इस अवस्था में सीखने की क्षमता तथा व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण परिवर्तन आते हैं। किशोर छात्र-छात्राओं में इण्टरनेट के प्रयोग सम्बन्धी सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों प्रभाव पड़ता है। जिसका विस्तृत अध्ययन और विश्लेषण इस शोध अध्ययन का मुख्य विषय है।
शोध अध्ययन क्षेत्र:-
अम्बेडकर नगर उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख जनपद है। जिसका जिला मुख्यालय अकबरपुर है। जिसका कुल क्षेत्रफल 2,520 वर्ग किमी0 है। 2011 की जनगणना के अनुसार अम्बेडकर नगर की कुल साक्षरता 76.86ः है। जिसमें पुरुष साक्षरता 82.53ः तथा महिला साक्षरता 70.84ः है। क्षेत्र की 88.29ः जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। जिनकी आजीविका का मुख्य साधन कृषि और उससे सम्बन्धित उद्योग है। जिले में लिंगानुपात 976 है जोकि भारत में 1000 पुरुषों पर 940 महिलाओं की तुलना में अधिक है। शोध अध्ययन हेतु 100 किशोर छात्र तथा 100 किशोर छात्राओं (13-18 वर्ष) कक्षा-टप्प्प्, कक्षा-ग्प् तक के छात्रों को सर्वेक्षण के लिए चयन किया गया है।
शोध अध्ययन का उद्देश्य:-
1. किशोर छात्र-छात्राओं में इण्टरनेट की सकारात्मक तथा नकारात्मक उपयोगिता का अध्ययन करना।
2. इण्टरनेट के प्रयोग से किशोर छात्र-छात्राओं में व्यवहार सम्बन्धी परिवर्तनों का सर्वेक्षण करना।
3. अध्ययन क्षेत्र में इण्टरनेट के माध्यम से हुए परिवर्तनों का किशोरों पर प्रभाव का अध्ययन करन।
आंकड़ा स्रोत तथा विधितंत्र:-
प्रस्तुत शोध पत्र में प्राथमिक तथा द्वितीयक स्रोत से प्राप्त आँकड़ों का प्रयोग किया गया है। प्राथमिक आँकड़ों के संग्रह हेतु प्रश्नावली विधि तथा द्वितीय स्रोत के आँकड़ों के संग्रह के लिए विभिन्न सरकारी तथा गैर-सरकारी स्रोत से प्राप्त आँकड़ों का प्रयोग किया गया है। सर्वेक्षण हेतु लिर्क्ट मापक (5 बिंदु) का प्रयोग किया गया है। तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए यथा स्थान पर तालिकाओं का प्रयोग किया गया है। यह शोध पत्र अम्बेडकर नगर जनपद के जय बजरंग इण्टरमीडिएट कॉलेज रामनगर तथा एस0डी0 मदर इण्टरनेशनल इण्टरमीडिएट कॉलेज, अन्नापुर, रामनगर से 100 किशोर तथा 100 किशोरी छात्र-छात्राओं (13-18 वर्ष) का चयन शोध और सर्वेक्षण हेतु किया गया है।
परिणाम एवं परिचर्चा:-
प्रस्तुत शोध पत्र में किशोर छात्र-छात्राओं में इण्टरनेट की व्यवहारिक उपयोगिता का सर्वेक्षण किया गया है। जिसके लिए शोध अध्ययन क्षेत्र के दो कॉलेजों के (13-18 वर्ष) आयुवर्ग के 100-00 किशोर छात्र-छात्राओं से प्राप्त सूचनाओं का गहन एवं सूक्ष्मता से अध्ययन किया गया है तथा यह जानने का प्रयास किया गया है कि इण्टरनेट किशोर छात्र-छात्राओं के दैनिक जीवन में कितना उपयोगी तथा अनुपयोगी है। क्या इण्टरनेट छात्र-छात्राओं के व्यवहार में परिवर्तन को प्रभावित करता है? क्या सभी का इण्टरनेट की सुविधा सामान्य रूप में सुलभ है या संसाधनों की पहुँच में असमानता और विषमता है? उत्तदाताओं से प्राप्त अभिमत को निम्नलिखित विभिन्न सारणियों में दर्शाया गया है।
तालिका-1
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नोट: उत्तरदाता द्वारा दी गयी जानकारी को पूर्णतः गुप्त रखा गया है।
निष्कर्ष:-
प्रस्तुत शोध पत्र में संलग्न तालिका-1 के विश्लेषण और व्यक्तिगत शोध अनुभवों से निम्न प्रकार का निष्कर्ष निकलता है। शोध हेतु (13-18 वर्ष) के आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं को सम्मिलित किया गया है। जहाँ इण्टरनेट के माध्यमों की पहुँच बहुत सीमित है तथा जागरूकता का अभाव है। इसी कारण 28ः छात्र-छात्राओं का मानना है कि वे इण्टरनेट का प्रयोग अपेक्षाकृत ज्यादा करते हैं जो शहरी क्षेत्र के उक्त आयु वर्ग की तुलना में बहुत कम है। जो सामाजिक आर्थिक पिछड़ेपन को दर्शाता है। इसी प्रकार मात्र 8ः छात्रों का मानना है कि इण्टरनेट द्वारा नये मित्र बनाए जाते हैं और 8ः छात्रों का मानना है कि मोबाइल संलग्नता के कारण उनका शिक्षण कार्य प्रभावित होता है और बाधा पहुँचाना है जो क्षेत्र के पिछड़ेपन का सूचक है। यहाँ तक कि इस क्षेत्र में इण्टरनेट के नकारात्मक प्रभाव की शुरूआत हो रही है। उक्त तालिका से स्पष्ट है कि 79ः लोग इण्टरनेट प्रयोग के सीमित करने का प्रयास करते हैं। शोधार्थिनी द्वारा किए गए सर्वेक्षण का सार यह है कि इण्टरनेट के प्रति उक्त अध्ययन क्षेत्र में जागरूकता न्यून है। अधिकांश छात्र सिर्फ इसका प्रयोग मनोरंजन और आनंद के लिए प्रयोग करते हैं जिसका वास्तविक अभिक्षमता विस्तार और ज्ञानार्जन में कोई भूमिका नहीं है। उक्त क्षेत्र में कौशल विकास, प्रशिक्षण तथा सरकारी गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा जागरुकता कार्यक्रम की अति आवश्यकता है ताकि यहाँ के छात्रों को मानव संसाधन के रूप में विकसित किया जा सके।
संदर्भ सूची %&
1. Chandana. R.C. and Sidhu, M.S. 1980 Introduction to Population Geography, Kalyany Publication, New Delhi, P. 68-72
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3. अग्रवाल जी0सी0 कुलश्रेष्ठ एस0पी0 (2017-18), शैक्षिक तकनीकी एवं सूचना सम्प्रेषण तकनीकी’, अग्रवाल प्रकाशन, पेज नं0 18-39
4. चौरसिया, सोनम, 2019, इण्टरनेट का किशोर छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वासथ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन’, स्वीकृत शोध प्रस्ताव, छात्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर, पेज नं0 3-5
5. सिंह अरूण कुमार (2017), मनोविज्ञान, समाजशास्त्र तथा शिक्षा में शोध विधियाँ, मोतीलाल बनारसीदास, पेज नं0 17-21
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7. शर्मा, कमलेश (2007), बाल विकास, स्टार प्रकाशन, आगरा, पेज नं0 101-117
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Received on 22.06.2023 Modified on 26.07.2023 Accepted on 29.08.2023 © A&V Publication all right reserved Int. J. Ad. Social Sciences. 2023; 11(3):142-146. DOI: 10.52711/2454-2679.2023.00022 |